Wednesday, January 28, 2026

Fish Tray

 After seeing Fish. One must thinking of frying and eating those. But I am something different kind.... After seeing a wooden tray, thought of mixing up pattachitra pattern painting with mandala design. It came out beautifully. 

It's coloured with acrylic paint and kept for drying it. Next day varnished it to make it waterproof. 

If anyone wants handcrafted items, then can DM me or you can comment me. 



Saturday, January 3, 2026

My first Crochet poncho

 Finally I completed a poncho fof my niece( sister's daughter) who is 2 n half years old. Just for a thought I started a crochet sweater for Asma, my sis putu told me to crochet a poncho fof her. As shs is too small, itz easy to crochet n she can wear it in this winter. 

Just look at the pics. I have crocheted a headband too. 


Just a simple n small thing can speak a lot about the love and happiness you want to share.




Wednesday, April 9, 2025

Artistic Creations & first milestone

 Since many years I have kept myself busy with my creativity. Now the time has come. When me & Sweta meet, always discuss to do something for ourselves. It's destiny that we started our start up creative small homebased business with Fabric jewellery, terracotta jewellery, clay jewellery, wall hangings. Then it started with these and step by step we got order from few friends and moved forward towards Nameplate, car hangings, fridge magnets, coasters, crochet clips n many more. 

With help of Madhu di, sister of Sweta we showed few products. Those are shown to their heads for online platform like Amazon, Meesho etc. We organise exhibitions there in Kamothe Sector 22 in Maan Deshi Foundation. It's our first milestone that our 2 clay jewellery sets n terracotta jewellery is been selected for online platform. Many more are in our insta page & on YouTube channel. 

We customize your orders. Your support is needed to serve you better.




Everyone be with us for more updates. 
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Lopamudrapal27 
Sweta.kumar.4
Artisticcreation_25

Stay Tuned for more updates.


Friday, January 13, 2023

ग़ज़ल -ए- सीखा

 सीखा ( लोपामुद्रा)


तरकीब को कर शरीख़ ज़िन्दगी जीती जाती हूँ,

"सीखा" नाम से रूबरू हुए, सबक सीखाती जाती हूँ।


अबरार-ए-दानिश को संग लेकर कायनात चाहती हूँ,

अपने क़दमों को रफ़्ता-रफ़्ता किस्मत संग चलना चाहती हूँ।


तहजीब-ए-जीस्त सीखाया है सबने, सुनती जाती हूँ,

ख़ुद को तवज्जो दिए, अब नज़्म-ए-खास सी सजती हूँ।


आफ़ताब को आईना दिखाने की हिम्मत भी रखती हूँ,

ख़ामोश निगाहों से अब्र को ताक ख़ुद बारिश बन जाती हूँ।


शब-ए-फ़िराक में भी बहारों के ख़्वाब से नशीमन होती हूँ,

ख़ुद ही बन ख़ुद की माशुका, आजमाइश ख़ुद की करती हूँ।


ख़्वाबगाह से ख़्वाब चूरा कर रंगों से सराबोर करती हूँ,

इज़्ज़त अफ़जाई के हक़ को हमेशा तवज्जो देती रहती हूँ।


नेमत-ए-जीस्त समझकर हमदर्द ख़ुद को बनाती हूँ,

तूफ़ान सा उफ़ान बनती, सागर की ठंडक भी बनती हूँ।


तकल्लुफ-ए-ज़िन्दगी को कर दर किनार चलती हूँ,

सुर्ख लबों पर मुस्कान रख ज़िन्दगी की लुफ़्त उठाती हूँ।


"सीखा" संग फलक तक का सफ़र अकेले तय करती हूँ,

कारवां गुज़रे ना कभी, हौसला अफजाई ख़ुद की करती हूँ।


बज़्म-ए-महफ़िल में बात होती है हमेशा एहसासों की,

ज़िन्दगी संग ग़ुफ़्तगु कर दानिश -ए-रोशनदान बनना चाहती हूँ।



// लोपामुद्रा //... काव्य प्रतिरूप

 // लोपामुद्रा //

🔆🌸🔆🌸🔆

लो- लोगों के दिल में रहने वाली

पा- पावन हृदय में प्रेम संजोने वाली

मु- मुश्किलों से लड़ते हुए आगे बढ़ने वाली

द्रा- द्राव्य की तरह हर रिश्तों में घुल जाने वाली


लोपामुद्रा- नायाब तारे का नाम, 

दक्षिण दिशा की शान है,

अगस्त्य मंडल में उदित होता है,

एक विदूषी और वेदाज्ञी नारी

अगस्त्य मुनि की धर्म पत्नी कहलाती है।


पांड्य राजा मलयध्वज की पुत्री है,

कृष्णेक्षणा के नाम से जानी जाती है,

ऋग्वेद में कई मंत्र श्लोक की जन्मदात्री है,

ज्ञान दर्पण वो आध्यात्मिकता की प्रतिष्ठात्री है।


सहनशीलता, क्षमा, दयालु और तपस्वी है,

ललिता सहस्रनाम स्तोत्र पाठ की प्रचारिका है,

महाभारत, ब्रह्मपुराण में मंत्रों संग स्थापित है,

ललितोपाख्यान में श्लोक में समाई शिक्षिका है।


धन्य है मेरे माता पिता जो नाम चयन ऐसा किया,

एक विदूषी संग उम्र भर के लिए रिश्ता जोड़ दिया।

अर्थ जान कर अभिभूत हो रहे हैं अपने नाम संग,

लोपा या कोशीतकी, परिचय प्रदान अनोखा किया।


वरप्रिया है, हृदय में प्रेम धारा बरसा कर स्थापित हो,

ऐसा कुछ जीवन में खुशियों का संभार है ईश ने दिया,

लेखन जगत में कदम रखकर, मूल्यांकन हम कर पाए,

"लोपामुद्रा" के नाम से पहचान बना, ख़ुद को मान दिया।


जीवन मंत्र को सिद्ध करने को तैयार हमेशा रहती है,

प्रतिकूल परिस्थितियों में अनुकूलता ढूँढती रहती है,

हर व्यक्ति के हृदय में प्यार से सजना हमेशा चाहती है,

सहायक बन, सबको सम्मानित कर, सबके संग चलती है।



Wednesday, August 24, 2022

दोहा- भक्ति वंदन

 दोहा- भक्ति वंदन

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// ईश मेरे शाम //
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ईश तेरा छप छड़ जग, तू जाय कहूं ओर।
तुम बिन यज्ञ तप नाही, तुम संग सब छोर।।

देह मन सब तेरा ईश , तुम सकल आधार।
धन जन मन सब तेरा ईश, ना कोई आकार।।

राधा माधव रास रच, मन मगन सबका हो।
काहे पीड़ा रखे तू, ममता में रमा हो।।

भय ना कर कल की सोच, आज मैं जी जा तू।
फल की आशा ना कर अब, कर्म करता जा तू।।

आशिष मिल जाए तो, जगत अपना लागे।
हृदय तल आतुर हो, पर ही निज लागे।।

मन की सुन काम करो, हो ना असफल कभी।
दुविधा दूर हो तब, सम रूपी हो सभी ।।

शाम नाम पर हो रहा, असर मन में अपार।
मंगल कुसल शुभ हो, हर सब मन विकार।।

शाम सुमर निश दिन, परम ज्ञान वो पाय।
तब नाम संग जी लगा, सब जग जीवत जाय।।


LopaTheWriter

प्रतिरूप कहानी ---शिक्षा की सखी लोपा ( सीखा)

hi everyone,

After many years, I got the proper meaning of my names. I have written a story on it.


 शिक्षा की सखी लोपा ( सीखा)

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गाँव में नारा लग रहा था-" शिक्षामित्र योजना के तहत सर्वशिक्षा अभियान शूरू कर रहे हैं। सबको समान शिक्षा मिलेगा।" यह बात सुन आठ साल की लोपा ने पढ़ाई को अपना साथी बनाने की मन में ठान लिया। जो लड़की पढ़ाई में अच्छी थी, अच्छे अंक से सबको प्रभावित करती थी, उसे खुद ख़ुद पढ़ाई करना पसंद नहीं था। पता नहीं, नारेबाजी जब लग रही थी, तब वो आवाज़ कुछ तो झकझोर दिया उसके मन में। आँखों में कुछ अठखेलियां करने लगी। चुपचाप रहकर कुछ बातें बड़बड़ाने लगी। उसने अपने आप से जैसे वादा कर लिया कुछ बनकर रहेगी। चिकित्सक बनने को अपने मन को मना लिया। धीरे धीरे वक्त़ बीत गया। वो छोटी सी लड़की से एक युवती बन गई थी। कॉलेज में प्रवेश कर लिया और चिकित्सक बनने के लिए अपनी कलम और स्याही को पढ़ाई में डूबा दिया। पता नहीं, समय के दरिया में छोटी छोटी बातों से जैसे ख़ून, कटी घाव को देख कर बेहोश होने लगी। जब ऐसा बहुत बार हुआ, तो उसने अपना सपना चिकित्सक बनने का त्याग करना चाहा। पर अपनी पढ़ाई पूरी कर आगे बढ़ने की कोशिश करने को ठान लिया। घर की बड़ी बेटी थी, तो जिम्मेदारी से बच पाना मुश्किल था। अपने क़दमों को वो रोकना नहीं चाहती थी। घर के हालात संग ताल मिलाने को तैयार हो गई। जब वो बारवीं में थी, छठी कक्षा की एक लड़के को पढ़ाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसके अंदर कूट-कूट कर शिक्षा की बीज बो रही थी।
समय के दरिया बहता गया, उसने अपनी ज़िन्दगी को जीने का अंदाज़ सीख लिया था। समय के लहरों संग वो बहती गई। लड़की है, शादी तो करनी पड़ेगी। बस पढ़ाई ख़त्म हुई नहीं कि हाथ पीले कर दिया गया। आस को अपने दिल में दबा कर रखी थी। उसकी हक़ अदा किसी ने नहीं किया। पर कभी ख़ुद से हार नहीं मानी। जब वो पति के संग पुना चली गई, वहां पर अगल बगल के बच्चों को पढ़ाने लगी। बच्चों को पढ़ाने में उसको जो खुशी होती थी, कि पुछो मत। सबने उसकी आँखों के सपनों को पढ़ा था। जो अच्छे दोस्त मिले, उन्होंने उसको शिक्षिका बनने का सुझाव दिया।
आज वो ग्यारह साल से शिक्षिका को अपना साथी बनाकर एक नई पहचान बनाई है। हर रोज कुछ न कुछ सीखा और सिखाती गई सबको। बच्चों से बहुत प्यार करती थी, तो शिक्षिका बन सबकी चहेती बन गई। जब विद्यार्थी उसकी इज़्ज़त अफ़जाई करते हैं, वो सालों पुरानी बात वो शिक्षा अभियान का सोच मुस्कान भर देती है।
सही है, उसने अपने नाम को सार्थक बनाया है। "सीखा" शिक्षा की शीखा बन सबको रोशनी प्रदान करती है। उम्र का ना दीवार, ना जात-पात का प्रभाव। एक अविरल धारा की तरह बह जाती है। सबको नए विचारों से अवगत कराए वो अपने आप को सशक्त करती जाती है।

लोपामुद्रा (सीखा) की यही है कहानी।